इतिहास

जिला रेवाड़ी का इतिहास दिल्ली के इतिहास के समकालीन है। महाभारत काल के दौरान रेवट नाम का राजा था, उनकी बेटी थी, जिसका नाम रेवती था। लेकिन राजा प्रेम से रीवा बुलाया करते थे। राजा ने अपनी बेटी के नाम पर “रीवा वाडी” नामक शहर स्थापित किया । बाद में रीवा ने भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम से शादी कर ली और राजा ने अपनी बेटी को दहेज के रूप में “रीवा वाडी” दान किया। बाद में रीवा वाडी शहर रेवाड़ी के रूप में जाना गया ।

रेवाड़ी में रहने वाले अधिकांश जाति मोरया, गुप्ता और गुज्जर थे। हालांकि अब अधिकांश लोग अहीर जाति के हैं, सभी समुदाय के लोग सद्भाव के साथ रहते हैं। शहर में पंजाबी और गुप्ता के पास कारोबार है।